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कुत्ते का वैरी कुत्ता - A Dog's Enemy is Another Dog

कुत्ते का वैरी कुत्ता

Those of the same nature are often each other's worst enemies.

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‘एको दोषो विदेशस्य स्वजातिर्यद्विरुध्यरों’


विदेश का यही दोष है कि वहाँ स्वजातीय

ही विरोध में खड़े हो जाते हैं।


एक गाँव में चित्रांग नाम का कुत्ता रहता था। वहां दुर्भिक्ष पड़ गया। अन्न के अभाव में कई कुत्तों का वंशनाश हो गया। चित्रांग ने भी दुर्भिक्ष से बचने के लिये दूसरे गाँव की राह ली। वहाँ पहुँच कर उसने एक घर में चोरी से जाकर भरपेट खाना खा लिया। जिसके घर खाना खाया था उसने तो कुछ नहीं कहा, लेकिन घर से बाहर निकला तो आसपास के सब कुत्तों ने उसे घेर लिया। भयङ्कर लड़ाई हुई। चित्रांग के शरीर पर कई घाव लग गये। चित्रांग ने सोचा-‘इससे तो अपना गाँव ही अच्छा है, जहाँ केवल दुर्भिक्ष है, जान के दुश्मन कुत्ते तो नहीं हैं।’

यह सोच कर वह वापिस आ गया। अपने गाँव आने पर उससे सब कुत्तों ने पूछा-”चित्रांग! दूसरे गाँव की बात सुना। वह गाँव कैसा है? वहाँ के लोग कैसे हैं? वहाँ खाने-पीने की चीज़ें कैसी हैं?”

चित्रांग ने उत्तर दिया-”मित्रों, उस गाँव में खाने-पीने की चीज़ें तो बहुत अच्छी हैं, और गृह-पत्नियाँ भी नरम स्वभाव की हैं; किन्तु दूसरे गाँव में एक ही दोष है, अपनी जाति के ही कुत्ते बड़े खूंखार हैं।”


बन्दर का उपदेश सुनकर मगरमच्छ ने मन ही मन निश्चय किया कि वह अपने घर पर स्वामित्व जमाने वाले मगरमच्छ से युद्ध करेगा। अन्त में यही हुआ। युद्ध में मगरमच्छ ने उसे मार दिया और देर तक सुखपूर्वक उस घर में रहता रहा।